PMAY-G वित्तीय प्रबंधन और लाभार्थी चयन
वित्तीय प्रबंधन और लाभार्थी चयन प्रक्रिया
समझें कि PMAY-G योजना का वित्तीय प्रबंधन कैसे होता है और लाभार्थियों का चयन किस आधार पर किया जाता है।
PMAY-G का वित्तीय प्रबंधन और लक्ष्य निर्धारण
किसी भी बड़ी सरकारी योजना की सफलता उसके मजबूत वित्तीय ढांचे और स्पष्ट लक्ष्यों पर टिकी होती है। PMAY-G में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि फंड सही जगह पहुंचे और समाज के सबसे कमजोर वर्गों को प्राथमिकता मिले।
PMAY-G का बजट और लागत
- कुल लागत: वर्ष 2018-19 तक के कार्यक्रम की कुल लागत ₹1,30,075 करोड़ अनुमानित है।
- लागत में साझेदारी: यह लागत केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मैदानी क्षेत्रों में 60:40 और पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों में 90:10 के अनुपात में साझा की जाती है।
- फंडिंग के स्रोत: केंद्रीय बजट के अलावा, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) से भी ऋण लिया जाता है।
कमजोर वर्गों के लिए लक्ष्य निर्धारण
PMAY-G यह सुनिश्चित करती है कि लाभ समाज के सबसे वंचित तबकों तक पहुंचे।
- SC/ST के लिए: कुल लाभार्थियों में से कम से कम 60%।
- अल्पसंख्यक समुदायों के लिए: कुल निधियों का 15% हिस्सा।
- दिव्यांगजनों के लिए: कुल लाभार्थियों में से कम से कम 3%।
PMAY-G में लाभार्थी कैसे बनें? जानें पूरी चयन प्रक्रिया
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारदर्शी और निष्पक्ष लाभार्थी चयन प्रक्रिया है। पुरानी योजनाओं की तरह अब बीपीएल सूची के आधार पर चयन नहीं होता, बल्कि एक वैज्ञानिक और सामाजिक-आर्थिक मानदंडों पर आधारित प्रक्रिया अपनाई जाती है।
चयन का आधार: सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011
PMAY-G के तहत लाभार्थियों की पहचान का मुख्य आधार SECC 2011 के आंकड़े हैं। इसके तहत उन परिवारों की पहचान की जाती है जो बेघर हैं या एक/दो कमरों वाले कच्चे मकानों में रहते हैं।
प्राथमिकता का निर्धारण
लाखों पात्र परिवारों में से किसे पहले घर दिया जाएगा, यह तय करने के लिए एक बहु-स्तरीय प्राथमिकता प्रक्रिया अपनाई जाती है:
- स्वतः अंतर्वेशन (Automatic Inclusion): सबसे अधिक वंचित परिवार (जैसे आश्रयविहीन, हाथ से मैला ढोने वाले) को सूची में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
- आवास अभाव के आधार पर प्राथमिकता: इसके बाद, शून्य, एक या दो कमरों वाले कच्चे मकानों में रहने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य परिवारों को प्राथमिकता सूची में रखा जाता है।
ग्राम सभा की भूमिका: पारदर्शिता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी
सिस्टम द्वारा तैयार की गई प्राथमिकता सूची को सत्यापन के लिए ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। ग्राम सभा गलत नामों को हटा सकती है और छूटे हुए पात्र परिवारों के नाम शामिल करने के लिए आपत्ति दर्ज करा सकती है।
शिकायत निवारण तंत्र
यदि कोई व्यक्ति चयन प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं है, तो वह ब्लॉक और जिला स्तर पर अपीलीय समिति के समक्ष शिकायत कर सकता है, जिसका निपटारा 15 दिनों के भीतर किया जाता है।